मैं अपने घर का दरवाजा बंद करके बाहर घूमने जा रही थी किताब पूरी करने के बाद मुझे मेरी दोस्त ने कुछ इक से दो किलोमीटर की दूरी पर बने रेस्टोरेंट में बुलाया था | वह काफी अजीब सी बातें कर रही थी फ़ोन पर | तो मैंने उससे रेस्टोरेंट में आने को कहा ताकि आराम से बैठ कर बातें कर सकें और इस सर्दी के मौसम का मज़ा भी ले सकें |
मैं पूरे इक हफ्ते से कहीं बाहर नहीं गयी थी तो सोचा आज बाहर ही मिल लेते हैं |
मैं रेस्टोरेंट पहुँच गयी और मैंने अपनी दोस्त अमिया को वहां बैठे मेरा इंतज़ार करते हुए देखा |
हम दोनों गले मिले और आराम से कुर्सी पर बैठे गए |
अमिया ने कुछ हिचकिचाते हुए मुझे काफी आश्चर्यजनक बात बोली
" तुझे पता है , वह लौट आया " , अमिया ने कहा
" कौन ? " मैंने पूछा
अरे वही जो तुझसे पागलों की तरह प्यार करता था और पुरे कॉलेज के सामने परपोज़ किया था तो तूने उसके गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया था |
" आदित्य " , धीमे से मेरे मुँह से निकला
" हाँ वही तेरा पुराना आशिक़ ", आदित्य
मैं आज भी उस के चेहरे को भुला नहीं पायी | मुझे काफी पछतावा हुआ था उसके बाद जब मैंने उसके गाल पर तमाचा जड़ा था | असल बात तो यह थी की आदित्य कॉलेज का काफी चर्चित नाम था वह काफी आकर्षक लगता था दिखने में |
जब उसने पुरे कॉलेज के सामने यह सब किया तो मुझे लगा की वो मेरा मज़ाक बना रहा है और यही सब सोच कर गुस्से में मैंने उससे चांटा जड़ा दिया था ताकि वह सबक सीख जाए मगर उसकी आँखें कुछ और ही बयां कर रही थी |
खैर छोड़ो जो बीत गया अब उसपर अफ़सोस करने से कोई फायदा नहीं |
हमने इक दूसरे से विदा ली और अपने अपने घर की और चल दिए |
जब मैं दूसरे दिन कॉलेज पहुंची थी तो बहुत ही अजीब सा माहौल था | बाद में पता चला की आदित्य ने कॉलेज चोर दिया मेरी वजह से और मुझे आज भी अपनी इस गलती का पछतावा है
" लेकिन इक मिनट ", आदित्य अब इस शहर में आ गया है "
मुझे अचानक से अजीब सी उलझन और दर सताने लगा की इतने छोटे पहाड़ी वाले इलाके में कहीं हमारा आमना सामना न हो जाए |
क्या होगा तब और क्या आदित्य अब अपना बदला लेगा और किस तरीके से....
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